समाजवाद सिर्फ एक शब्द ही नहीं है जो सिर्फ देश के लोगों की सहानुभूति अर्जित करने के लिए बना है। समाजवादी एक सोच है,एक विचारधारा है जो देश में रह रहे हर वर्ग ,हर समुदाय ,हर तबके, हर जाति,हर धर्म के लोगों के मन से हर प्रकार के भेदभाव को मिटाते हुआ उन्हे एक ध्वज के नीचे खड़ा करती है। #समाजवादीविचारधारा की नज़रों से देखा जाये तो किसी भी धर्म,वर्ग,जाति या समुदाय आदि से बढ़कर भी एक चीज़ है जिसे हम मानवता कहते है। अमीर हो चाहे गरीब,समाजवाद हर इंसान को इंसान की नज़रों से देखने की प्रेरणा देता है और आगे भी देता ही रहेगा । क्योंकि यदि हमे बनाने वाले ने हमे बनाते वक़्त कोई फ़र्क़ नहीं किया तो हम क्यों करें। समाजवाद एक ऐसे समाज की परिकल्पना करता है जो सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक भेद को मिटाते हुए समत और स्वतंत्रता के आधार पर एक वर्णविहीन समाज की स्थापना करता है

समाजवाद का एकमात्र लक्ष्य साम्यवाद है। जिसके बाद समाज को संपूर्ण संपन्न स्थिति में किसी #राजनीतिक नियंत्रण की आवश्यकता नहीं पड़ती। समाज खुद-ब-खुद स्वशासित बन जाता है। यदि आप सोच रहें है कि हमारी पार्टी से जुड़ने के बाद ही आप एक सच्चे समाजवादी बन सकते है तो आप कहीं न कहीं गलत है,आपको बता दें कि कोई भी व्यक्ति कहीं भी अगर निस्वार्थ भाव से समाज के हित और अन्याय के खिलाफ बिना डरे अपनी आवाज़ उठाता है तो वह एक सच्चा समाजवादी कहलाता है।

समाजवाद का सीधा वार समाज पर बोझ की तरह बढ़ रही कुरीतियों और उसकी जड़ों पर है, जैसे #पूँजीवाद,#वंशवाद #जातिवाद आदि। समाजवाद और उससे जुड़े लोगों का मानना है कि समाज की हर वो रीत जो देश में उंच-नींच की भावना को ज़रा सा भी बढ़ावा देती है तो वह एक कुरीति है जिसका हम सभी को मिलकर विरोध करना चाहिए ताकि देश के हर नागरिक को सामान दृष्टि से ही हर वो ओहदा,न्याय और नाम मिले जिसके वो काबिल है। समाजवाद मनुष्य को मनुष्य के गुणों से पहचाने जाने की बात पर बल देता है नाकि उसके जात,धर्म व् पैसे से। समाजवाद की नज़रों इस देश का हर नागरिक एक सामान न्याय,विकास और अधिकार के योग्य है फिर चाहे वो अमीर हो गरीब हो,ब्राह्मण हो हरिजन हो,शहरी हो या #आदिवासी। विश्व के इस सबसे बड़े #लोकताँत्रिक देश में सभी एक सामान है।

राष्ट-पिता #महात्मागाँधी हमारे भारत वर्ष के प्रथम प्रमुख समाजवादी नेता थे। जिन्होंने सत्य और अहिंसा जैसे अस्त्रों से अंग्रेजी हुक़ूमत को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। उन्होंने उस वक़्त भेदभावों से परे देश की जनता को एकजुट करके अपने समाजवादी होने का परिचय दिया और जनता को हुक़ूमत के ज़ुल्मो से मुक्त किया। उन्ही की सोच के साथ चलते हुए #लोकनायक श्री जयप्रकाश नारायण ने भी इस समाज पर हो रहे हुक़ूमत के ज़ुल्मों का बहिष्कार किया। उन्होंने सन 1970 में देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गाँधी के विरुद्ध “सम्पूर्ण क्रांति” नामक आन्दोलन चलाया। यह क्रांति आम आदमी के हित के लिए हुक़ूमत को उखाड़ने के लिए लायी गयी थी। लोकनायक नें कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है— राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है। इस क्रांति के अंगारे ऐसे भड़के कि हुक़ूमत पाँव उखड़ गए थे।

इन्ही समाजवाद नायकों के विचारों पर चलते हुए देश के नौवें प्रधानमंत्री स्व.श्री ने 5 नवम्बर सन 1990 को #समाजवादीजनतापार्टी की नीव रखी जिसका मक़सद सीधा और स्पष्ट था- शोषित वर्गों के लोगों की आवाज़ बनना ,देश में हो रहे अन्याय के प्रति मिलकर आवाज़ उठाना ताकि समाज में फैली असमानता की जड़ों को उखाड़ फेंका जाए। और जनता को उनके हक़ से वंचित न रखा जाए। उन्होंने लोक सभा की निर्वाचन करते हुए ८ बार उत्तर प्रदेश के बलिया क्षेत्र से चुनाव जीता था। चंद्रशेखर जी का मानना था कि दूसरों के लिए किया गया वही कार्य रंग लाता है जिसमे अपना स्वार्थ कहीं न छिपा हो। ऐसे नेक विचारों की शिक्षा उन्हे अपने गुरु आचार्य नरेन्द्र देव जी से मिली थी।

आचार्य नरेन्द्र देव जी के अनुसार एक आदर्श समाज वही है जहाँ अमीर – गरीब में कोई भेद न हो ,जहाँ प्रजानन सुखी और समृद्ध रहे। लेकिन जब तक समाज में #पूंजीवादियों,और अन्य कुरीतियों का दबदबा बना रहेगा तब तक ऐसे समाज की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। आचार्य जी का कथन है कि आज मानव को अपने निर्वाह के लिए रोटी,कपड़ा,निवास-स्थान, शांति और स्वतंत्रता वांछनीय है ,जिनकी उपलब्धि सिर्फ एक सच्चे समाजवाद की स्थापना के द्वारा ही की जा सकती है। उनके लिए “मानवता ही समाजवाद का आधार था” आचार्य जी के अनुसार #समाजवाद जितना आर्थिक बल देता है ,उतना ही वह व्यक्तिगत स्वातंत्र्य के विकास पर भी बल देता है। उन्होंने अपने भारतीय समाज को एक नयी दिशा दी। जिसने चंद्रशेखर जैसे सपूत शिष्य के हाथों समाजवादी जनता पार्टी का निर्माण करवाया।

व्यक्ति का पूर्ण विकास समाजवादी समाज में ही हो सकता है इसमें कोई दो राय नहीं है। क्योंकि समाजवाद मानव स्वतंत्रता की कुंजी है। आज भले ही #आचार्यनरेन्द्रदेव जी और #चंद्रशेखरजी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके विचार ,उनकी पार्टी और उनकी सोच पर चलने वाले पार्टी के नेता हमारे बीच है जो समय समय पर जनता के साथ मिलकर उनपर हो रहे अन्याय के खिलाफ हमेशा आवाज़ उठाते है और उठाते रहेंगें।